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Home मनोरंजन खेल

Nitu Ghanghas: When Father Had Put Job At Stake For Nitu, Today Created History By Becoming World Champion, Know The Story Of Struggle Nitu On Mary Kom Nitu Life Story

admin by admin
March 26, 2023
in खेल
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Nitu Ghanghas: When Father Had Put Job At Stake For Nitu, Today Created History By Becoming World Champion, Know The Story Of Struggle Nitu On Mary Kom Nitu Life Story
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दोनों मुक्केबाज करीब होकर खेल रही थी और एक दूसरे को जकड़ रही थी जिसमें दूसरे राउंड के अंत में नीतू पर ‘पेनल्टी’ से अंक कांट लिये गये. दूसरे राउंड में मंगोलियाई मुक्केबाज की मजबूत वापसी के बावजूद नीतू इसे 3-2 से अपने हक में करने में सफल रही. फिर अंतिम तीन मिनट में नीतू ने दूर से शुरूआत की और अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए फिर करीब से खेलने लगीं जिसमें अल्तानसेतसेग का भी प्रतिद्वंद्वी को जकड़ने के लिये एक अंक काट लिया गया. अंत में भारतीय मुक्केबाज विजेता रहीं.

बचपन में कुछ ऐसी थी नीतू

नीतू बचपन से ही थोड़ी गुस्से वाली लड़की थी, जिसकी वजह से अक्सर स्कूल में उनकी लड़ाई हो जाती थी. इस चीज़ को देखते हुए उनके पिता ने फैसला किया की इस आक्रामक अंदाज़ और ऊर्जा को सही जगह उपयोग करना चाहिए और उन्हें इसके लिए मुक्केबाज़ी एक बेहतर माध्यम लगी. फिर क्या था मात्र 12 साल की उम्र में नीतू रिंग में उतर गई और मुक्केबाज़ी शुरू कर दी और अपनी कड़ी मेहनत के बल-बूते महज 2 साल के बाद ही हरियाणा के राज्य अस्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर सबको चौका दिया. तब जब चोट के कारण वो दो महीने तक रिंग से बहार थी.

जब पिता ने नीतू के लिए दांव पर लगाई नौकरी 

नीतू के लिए मुक्केबाज़ी की शुरुआत इतनी आसान नहीं थी नीतू के पिता हरियाणा राज्य सभा के कर्मचारी थे (Nitu Ghanghas Life Story) और अपनी बेटी नीतू के खेल के संसाधनों और खाने पिने के इंतजाम की देखभाल के लिए बिना वेतन के तीन साल की छुट्टी ली और सभी संसाधनों के लिए छह लाख रुपये का कर्ज लेकर खुद की ज़मीन पर खेती करके गुजरा किया. यहां से पिता और बेटी दोनों के सपनो ने एक साथ उड़ान भरने की ठानी. नीतू ने अपने स्नातक की शिक्षा गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज से किया और उस दौरान BBC के नाम से मशहूर भिवानी बॉक्सिंग क्लब में शमिल हुई थी.     

आसान नहीं था नीतू का सफर  

नीतू के लिए ये सफर इतना आसान नहीं रहा है. इस मुकाम को पाने के लिए अपने स्नातक के दिनों में वो अपने पिता के साथ प्रतिदिन 40 किलोमीटर की दूरी तय करती थी ताकि मुक्केबाज़ी जैसे खेल में वो महारथ हासिल कर सके जो ताकत के अलावा, प्रतिरोध और मानसिक शक्ति को दर्शाता है. नीतू के लिए ये सब इतना आसान नहीं था, क्योंकि नीतू एक ऐसे परिवार से आती है जहा खेल को अपना लेना एक बड़ी चुनौती है और साथ ही उनके पिता ने जिस इक्षाशक्ति के साथ अपनी नौकरी को दांव पर लगाया था उस फैसले को भी सही साबित किया था, लेकिन कहते है ना की आप अपने फैसलों को लेकर मन से कितने मजबूत है उसपे सब कुछ निर्भर करता है और वहीं बात इस बाप बेटी की जोड़ी को नहीं रोक पाई और नीतू के पिता के बलिदानों ने उन्हें रिंग में एक फौलादी महिला बना दिया जो अपने लक्ष्य को पाने के लिए हर पल तैयार थी. 

आखिरकार मेहनत रंग लाई

समय के साथ साथ नीतू आगे बढ़ती गई और अपनी मेहनत को भी लगातार जारी रखते हुए नीतू ने साल 2017 और 2018 में नई दिल्ली और हंगरी में वर्ल्ड चैंपियनशिप में लाइट फलाईवेइट में दो स्वर्ण पदक हासिल कर रैंकों में इजाफा किया और वो यही नहीं रुकी. बाद में नीतू एशिआई और भारतीय युवा चैंपियन बनी. हालांकि नीतू के कंधे और कलाई की चोट ने उनके सफर में बाधा जरूर डालता रहा और उसके बाद महामारी ने और बाधाएं पैदा की. 

नीतू के सफर में मैरी कॉम की भूमिका 

नीतू के तैयारी के पीछे एक और बात थी ओलिंपिक चैंपियन मैरी कॉम की जबड़ा फैन नीतू फुटवर्क, डिफेंस, और फोकस इन सब पर काबू पाने के लिए वो मैरी कॉम का वीडियो (Neetu Watch Mary Kom Videos) देखा करती थी नीतू के लिए कोर्ट पर उनकी हरकतों को समझना और उसको अपना लेना उनके लिए आसान होता था.

जीत के बाद नीतू ने कहा

पहले तीन मुकाबले आरएससी (रैफरी द्वारा मुकाबला रोकना) से जीतने वाली नीतू ने पूरे टूर्नामेंट में दबदबे भरा प्रदर्शन किया. इस जीत से 2022 स्ट्रैंड्जा मेमोरियल में स्वर्ण पदक जीतने वाली नीतू विश्व चैम्पियन खिताब हासिल करने वाली छठी भारतीय मुक्केबाज बनी. नीतू ने कहा, ‘‘मैंने आज मुकाबले में आक्रामक खेलने का फैसला किया और मैं जीत के बाद बहुत खुश हूं. मुझे खुद पर, अपने परिवार पर गर्व है और मैं अपने कोचों विशेषकर मुख्य कोच भास्कर सर को शुक्रिया कहना चाहूंगी. ”



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